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संभाजीनगर मनपा चुनाव: भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, AIMIM दूसरे नंबर पर; शिंदे और ठाकरे गुट को झटका।
हेडलाइन: संभाजीनगर में 'कमल' खिला, AIMIM बनी दूसरी सबसे बड़ी ताकत; सेना के दोनों गुटों को करारी शिकस्त संभाजीनगर (औरंगाबाद): छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (CSMC) चुनाव 2026 के नतीजे घोषित हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया है, हालांकि वह बहुमत के जादुई आंकड़े से सिर्फ 1 सीट दूर रह गई। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने जोरदार वापसी करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है। इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू शिवसेना (शिंदे) और शिवसेना (उद्धव) दोनों गुटों का खराब प्रदर्शन रहा है, जिसे राजनीतिक पंडित मराठवाड़ा की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देख रहे हैं। 📊 फाइनल रिजल्ट (कुल सीटें: 115) | पार्टी | जीती गई सीटें | स्थिति | |---|---|---| | BJP (भाजपा) | 57 | सबसे बड़ी पार्टी (बहुमत से 1 दूर) | | AIMIM (एमआईएम) | 33 | दूसरी सबसे बड़ी पार्टी | | शिवसेना (शिंदे गुट) | 13 | उम्मीद से बहुत कम | | शिवसेना (UBT - ठाकरे) | 06 | भारी गिरावट | | वंचित बहुजन आघाडी (VBA) | 04 | - | | कांग्रेस | 01 | - | | एनसीपी (शरद पवार) | 01 | - | | एनसीपी (अजित पवार) | 00 | खाता नहीं खुला | 🔍 चुनाव की 5 बड़ी बातें (Key Highlights): 1. भाजपा का एकतरफा दबदबा, लेकिन 'मैजिक फिगर' से दूर भाजपा ने 115 में से 57 सीटें जीतकर शहर में अपनी पकड़ साबित कर दी है। बहुमत के लिए 58 सीटों की जरूरत थी। अब भाजपा को अपना मेयर बनाने के लिए केवल 1 निर्दलीय या अन्य सदस्य के समर्थन की जरूरत होगी, जो उनके लिए मुश्किल नहीं होगा। 2. AIMIM का गढ़ और मजबूत हुआ ओवैसी की पार्टी ने न केवल अपना पिछला प्रदर्शन सुधारा है, बल्कि 33 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी की भूमिका में आ गई है। मुस्लिम बहुल इलाकों के अलावा दलित-बहुजन समीकरण साधने में भी पार्टी कामयाब रही। 3. 'सेना बनाम सेना' की लड़ाई में दोनों का नुकसान शिंदे गुट और ठाकरे गुट के बीच की आपसी लड़ाई का सीधा फायदा भाजपा और AIMIM को मिला। * शिंदे गुट: सत्ता में होने और 96 सीटों पर लड़ने के बावजूद केवल 13 सीटें जीत पाया। * ठाकरे गुट: सिर्फ 6 सीटों पर सिमट गया, जो उनके लिए बहुत बड़ा झटका है क्योंकि संभाजीनगर कभी बाल ठाकरे का गढ़ माना जाता था। 4. दिग्गज नेताओं के रिश्तेदारों का रिपोर्ट कार्ड * जीते: जिले के पालक मंत्री (Guardian Minister) संजय शिरसाट के बेटे सिद्धांत शिरसाट और बेटी हर्षदा शिरसाट दोनों ने अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज की। * हारे: विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे (ठाकरे गुट) के भाई राजेंद्र दानवे को हार का सामना करना पड़ा। 5. कांग्रेस और एनसीपी का सूपड़ा साफ़ मराठवाड़ा में कभी मजबूत रही कांग्रेस पार्टी सिर्फ 1 सीट पर सिमट गई। यही हाल शरद पवार और अजित पवार की एनसीपी का रहा। अजित पवार गुट का तो खाता भी नहीं खुल सका। 🗳️ आगे क्या होगा? (What's Next) चूंकि भाजपा के पास 57 सीटें हैं और बहुमत के लिए 58 चाहिए, इसलिए शहर का अगला महापौर (Mayor) भाजपा का बनना तय माना जा रहा है। निर्दलीय या छोटे दलों के समर्थन से भाजपा आसानी से अपना बोर्ड बना लेगी। क्या आप वार्ड-वार विजेताओं (Ward-wise Winners) की लिस्ट भी देखना चाहते हैं?📍 हेडलाइन: संभाजीनगर में 'कमल' खिला, AIMIM बनी दूसरी सबसे बड़ी ताकत; सेना के दोनों गुटों को करारी शिकस्त संभाजीनगर (औरंगाबाद): छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (CSMC) चुनाव 2026 के नतीजे घोषित हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया है, हालांकि वह बहुमत के जादुई आंकड़े से सिर्फ 1 सीट दूर रह गई। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने जोरदार वापसी करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है। इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू शिवसेना (शिंदे) और शिवसेना (उद्धव) दोनों गुटों का खराब प्रदर्शन रहा है, जिसे राजनीतिक पंडित मराठवाड़ा की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देख रहे हैं। 📊 फाइनल रिजल्ट (कुल सीटें: 115) | पार्टी | जीती गई सीटें | स्थिति | |---|---|---| | BJP (भाजपा) | 57 | सबसे बड़ी पार्टी (बहुमत से 1 दूर) | | AIMIM (एमआईएम) | 33 | दूसरी सबसे बड़ी पार्टी | | शिवसेना (शिंदे गुट) | 13 | उम्मीद से बहुत कम | | शिवसेना (UBT - ठाकरे) | 06 | भारी गिरावट | | वंचित बहुजन आघाडी (VBA) | 04 | - | | कांग्रेस | 01 | - | | एनसीपी (शरद पवार) | 01 | - | | एनसीपी (अजित पवार) | 00 | खाता नहीं खुला | 🔍 चुनाव की 5 बड़ी बातें (Key Highlights): 1. भाजपा का एकतरफा दबदबा, लेकिन 'मैजिक फिगर' से दूर भाजपा ने 115 में से 57 सीटें जीतकर शहर में अपनी पकड़ साबित कर दी है। बहुमत के लिए 58 सीटों की जरूरत थी। अब भाजपा को अपना मेयर बनाने के लिए केवल 1 निर्दलीय या अन्य सदस्य के समर्थन की जरूरत होगी, जो उनके लिए मुश्किल नहीं होगा। 2. AIMIM का गढ़ और मजबूत हुआ ओवैसी की पार्टी ने न केवल अपना पिछला प्रदर्शन सुधारा है, बल्कि 33 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी की भूमिका में आ गई है। मुस्लिम बहुल इलाकों के अलावा दलित-बहुजन समीकरण साधने में भी पार्टी कामयाब रही। 3. 'सेना बनाम सेना' की लड़ाई में दोनों का नुकसान शिंदे गुट और ठाकरे गुट के बीच की आपसी लड़ाई का सीधा फायदा भाजपा और AIMIM को मिला। * शिंदे गुट: सत्ता में होने और 96 सीटों पर लड़ने के बावजूद केवल 13 सीटें जीत पाया। * ठाकरे गुट: सिर्फ 6 सीटों पर सिमट गया, जो उनके लिए बहुत बड़ा झटका है क्योंकि संभाजीनगर कभी बाल ठाकरे का गढ़ माना जाता था। 4. दिग्गज नेताओं के रिश्तेदारों का रिपोर्ट कार्ड * जीते: जिले के पालक मंत्री (Guardian Minister) संजय शिरसाट के बेटे सिद्धांत शिरसाट और बेटी हर्षदा शिरसाट दोनों ने अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज की। * हारे: विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे (ठाकरे गुट) के भाई राजेंद्र दानवे को हार का सामना करना पड़ा। 5. कांग्रेस और एनसीपी का सूपड़ा साफ़ मराठवाड़ा में कभी मजबूत रही कांग्रेस पार्टी सिर्फ 1 सीट पर सिमट गई। यही हाल शरद पवार और अजित पवार की एनसीपका रहा। अजितका तो खाता भी नहीं खुल
जालना
1/21/20261 मिनट पढ़ें
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